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यह अलफ़ाज़ मेरे हैं पर ये हौसला मेरा नहीं ,
यह जिस्म मेरा है, पर यह रूह मेरी नहीं ,
यह रौशनी मेरी है, पर यह दिया मेरा नहीं,
यह खुशबू मेरी है , पर यह फूल मेरा नहीं 
मैं तो तेरा साया हूँ माँ, तू मेरी है पर ये दुनिया मेरी नहीं | 


खामोश थी उसकी जुबान , फिर भी निगाहें जाने क्या कह गयी ,
उलझी थी उसकी लटें , फिर भी न जाने क्या सुलझा गयी | 
वो आग का दरिया थी या, रेत का सागर 
ना जाने क्यों मेरे अरमान साथ ले गयी | 


मुश्किलें कभी खुद नहीं आती उन्हें तो हम न्यौता देते हैं ,
क्योंकि मेहमान उसी घर आते हैं जिस घर मेहमाननवाज़ी अच्छी होती है | 


मैं दो पल का शायर नहीं , उसकी शायरी का ख्वाब हूँ ,
जो देखे मुझे आईने में, मैं उसकी नजरों का आफताब हूँ | 


मजा तो चलती ट्रैन की खिड़कियों से गुजरती हवा का भी आता है ,
पर क्या करें कम्बख्त ये वक़्त अकेले गुजर नहीं पाता है | 


ये हवा ये फ़िज़ा कहती रही रात भर ,
वो है बेवफा तू इंतज़ार ना कर | 


ग़ालिब की ग़ज़लों की नुमाइश नहीं करते ,
ये दर्द ही कुछ ऐसा है की कुछ और पाने की ख्वाहिश नहीं करते | 


कुछ ज्यादा क्या कहें कुछ काम क्या कहें ,
ये रास्ते हैं हसीन , इनसे कुछ क्या कहें | 


मिल जाते तो इस पल में वो बात ना होती , ऐसे यूँ मुलाकात ना होती ,
दिल्ली की गलियों में रात ना होती और हर आइस क्रीम इतनी ख़ास ना होती | 

Shayari dil se ❤ ❤ ❤

यह अलफ़ाज़ मेरे हैं पर ये हौसला मेरा नहीं , यह जिस्म मेरा है, पर यह रूह मेरी नहीं , यह रौशनी मेरी है, पर यह दिया मेरा नहीं, यह खुशबू मेरी है , पर यह फूल मेरा नहीं मैं तो तेरा साया हूँ माँ, तू मेरी है पर ये दुनिया मेरी नहीं | 2. …

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